सभी हरि वैष्णव जन को गणेश चतुर्थी की बहुत बहुत बधाई।

जय श्री कृष्ण
सभी हरि वैष्णव जन को गणेश चतुर्थी की बहुत-बहुत मंगलकामनाएं।



आप सभी हरि वैष्णव जन आज रिद्धि सिद्धि के दाता गणेश जी महाराज की पूजा अर्चना करें और एक विनम्र निवेदन हैं, की आप हर साल की भांति इस साल भी गणेश जी महाराज को अपने घर लेकर आते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं। तो भैया गणेश जी को लाने की आवश्यकता ही नहीं हैं, वह तो पहले ही आपके घर में विराजमान हैं। अगर लाते हैं, तो आपका भाव हैं,घर लाने के बाद सिर्फ गणेश चतुर्थी के दिन ही नहीं प्रतिदिन उनकी सेवा करें। बहुत सारे लोग खुशी – खुशी में ले तो आते हैं, फिर 10 दिन बाद उनको पीपल के पेड़ पर बिठा देते हैं। ऐसा क्यों करते हो जिस भगवान की इतनी पूजा अर्चना की और गणेश चतुर्थी के बाद उनको पीपल के पेड़ पर बिठा दिया, तो कृपया अपने धर्म का मजाक ना उड़ावे कोई भी देवता को पहले घर में लाते हैं , फिर बाद में पीपल के पेड़ के नीचे बैठा देते हैं। नवरात्रि के अंदर माताजी को घर में लाते हैं फिर 9 दिन के बाद में पीपल के पेड़ पर बिठा देते हैं अरे भैया आपने पीपल के पेड़ को समझ क्या रखा है?
पीपल का पेड़ साक्षात भगवान श्रीकृष्ण हैं,
परंतु कोई भी अनावश्यक वस्तु हो उसको जाकर पीपल के पेड़ पर बिठा देते हो, कितना बुरा लगता है, इसका परंतु एक आदमी जैसा कर रहा है, वैसा ही सबको करना हैं। एक तो आप लोग हैं, जो पीपल पर किसी भी देवता को बिठा देते हैं। और क्या अधिक कहूं कुछ लोग ऐसे देखे मैंने जो विवाह संपन्न होने के बाद में अपनी पत्रिका भी पीपल में चढ़ा देते हैं। और एक हमारे भक्त मेहता नरसी जी हैं, जो सर्वप्रथम मायरो री कुमकुमं पत्रिका पीपल के पेड़ पर अर्पित करते हैं, क्योंकि उनका भाव था कि यह पीपल का पेड़ नहीं साक्षात भगवान
श्री कृष्ण हैं।
अगर आपको मूर्ति बनानी हैं, तो आप गोमय से मूर्ति बनाएं और पूजा संपन्न होने के बाद पीपल के पेड़ में ना बिठाकर उसे किसी जल में रख देंवे और फिर उस जल को अगर आप पीपल के पेड़ पर चढ़ाएंगे तो पीपल के पेड़ को भी पुष्टि मिलेगी। ऐसा करना भी आपकी भक्ति में एक नंबर बढ़ा देगा । देखा जाए तो इतनी बड़ी विशाल मूर्ति बनाने की आवश्यकता ही नहीं हैं, परंतु  यह हमने भगवान की मूर्ति नहीं हमारे अहंकार की मूर्ति बनाई हैं।
हमें पता हैं, हमारी इस बात का आप लोगों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। परंतु हमारा सिर्फ कहने का कार्य हैं, जिस प्रकार घर में पिता पुत्र को संबोधित करते हुए कोई कार्य बताते हैं, और यदि उस कार्य को पुत्र नहीं करें तो पिता का सिर्फ कहने का कार्य था। जो उन्होंने कर दिया इसी प्रकार अगर आप लोग करें तो हमारा सनातन धर्म और मजबूत बनेगा, और लोगों को प्रेरणा मिलेगी। जिससे हम गलत मार्ग पर जा रहे हैं। उसे हम सही कर सकेंगे परंतु सबको जागृत होना पड़ेगा ।

परम पूज्य गोवत्स
श्री राधाकृष्ण जी महाराज के शिष्य

गोवत्स श्री मोहित मुदगल जी महाराज 

प्रतिदिन हरि नाम संकीर्तन सेवा
विश्व गौ सेवा
जागृति मिशन

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