करवा चौथ

करवा चौथ
का उपवास एक कन्या ने किया था। जिसके सात भाई थे वह आप सभी जानते हैं,, परंतु उस कन्या को वरदान प्राप्त था। पतिवर्ता शब्द तो सुने में भी नही आता हैं। जैसे सतीसावत्री
अपने मृतक पति को भी वापिस ले आई थी,, तो वह उनकी चलाकी नही थी। अपितु उनका जीवन ग्रहस्त में रहते हुए भी  ब्रह्मचारी जीवन का पालन करते थे, विवाह का सिर्फ एक ही मतलब था। संतान उत्पत्ति और हम अगर उसी में लगे रहे तो वो बहुत गलत हैं, पर आजकल दिखावे का जमाना हैं,, 365 दिन पति को पूछते नही एक दिन में उनका आशीर्वाद लेना चाहते हैं। रोजाना लड़ाई करना,, उनके वचनों पर ना चलना,,, अपने आप को कामवासन में लीन रखना,, कीर्तन ना करना,, कथा ना सुना
इसे उपवास आदि का महत्व काम हो गया हैं।
सिर्फ एक फॉर्मेलिटी रहे गई हैं,, परमपिता परमेश्वर ने जो आयु निर्धारित कर दी उसको कोई बदल नही सकता स्वयं ब्रह्मा जी भी नही बदल सकते हैं।
ऐसा नही है की उपवास करने से बीमारी नही आयेगी, या फिर आमुख व्यक्ति अमर हो जाएगा ।
ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं,, जो आना है उसे आना ही हैं वह नहीं रुकेगा,, रोकने से भी नहीं रुकेगा ,, हमारी इतनी सामर्थ्य नहीं है कि हम उसे रोक दें ।
अगर हम चाहते हैं, कि हमारे उपवास के द्वारा हर चीज सफल हो तो उसके लिए सर्वप्रथम त्याग करना होगा ।
उपवास का मतलब यह नहीं होता हैं कि एक समय भूखा रहो और एक समय भोजन पा लो
उपवास वह श्रेणी हैं। जिस श्रेणी में आकर इंसान अपनी उन सब चीजों को केंद्रित में कर लेता हैं। उपवास का मतलब हैं संयम, इंद्रियों पर विजय प्राप्त करना, यह मतलब होता हैं। उपवास का परंतु हम यह तो जानना नहीं चाहते और एक समय भोजन कर लिया वह उपवास हो गया तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं ।
इसलिए जीवन में त्याग होगा तो जीवन आनंदमय बनेगा, आप ऊर्जावान बनेंगे और इंद्रियां आप के अधीन होगी सदैव खूब नाम सेवा करो बाकी किसी के बढ़ाने से कोई उम्र नहीं बढ़ती हैं,, आजकल पति-पत्नी एक दूसरे से कहते हैं, सात जन्मों तक संबंध निभाएंगे, तुम्हारे लिए कुछ भी कर जाएंगे, तुम बहुत अच्छी लगती हो दोनों एक दूसरे को ठगते रहते हैं,, अर्थात कोरोना महामारी के दौरान जब संकट आया था। तो एक बंद कमरे में रख दिया वहां से ही भोजन डाल देते थे और कोई पास में नहीं जाता था अब जो कह रहे थे की सात जन्मो तक संबंध निभाएंगे वह सब सामने आ गया
सौ बातों की एक ही बात हैं, कि भगवान की शरण में रहो भगवान से विमुख ना हो

प्रतिदिन हरि नाम संकीर्तन सेवा
विश्व गौ सेवा जागृति मिशन

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